Tuesday, December 25, 2018

الصحف البريطانية تحتجب بمناسبة عيد الميلاد

احتفل المسيحيون العرب بأعياد الميلاد لهذا العام في أجواء هادئة نسبيا مقارنة بالسنوات القليلة الماضية.
ففي المناطق العراقية التي تم تطهيرها كليا من وجود مقاتلي الدولة الاسلامية احتفل المسيحيون لأول مرة بعيد الميلاد وسط إجراءات أمنية مكثفة.
وفي الموصل ونينوى استعاد المسيحيون حقهم الطبيعي في إقامة احتفالاتهم الدينية، وتدفقوا على كنيسة القديس يوسف للكلدان الكاثوليك في إربيل والسليمانية باقليم كردستان العراق.
وفي بغداد أقام المسيحيون قداس عيد الميلاد عبر الكنائس في أجواء من الأمل باستتباب الاستقرار. وكانت أعداد كبيرة من مسيحيي العراق، من مختلف الطوائف والمعتقدات، قد اضطرت الى اللجوء الى خارج البلاد فيما نزح آلاف آخرون من مدنهم وقراهم بسبب عنف مقاتلي تنظيم "داعش".
وطبقا لإحصاءات رسمية، فإن عدد المسيحيين في العراق انخفض من 1.5 مليون قبل الغزو الأميركي عام 2003 الى حوالي 400 ألف اليوم.
وكان البابا فرانسيس بابا الفاتيكان قد دعا في خطاب عيد الميلاد لهذا العام الى إحلال المحبة والسلام في مناطق الحروب مثل سوريا واليمن. وقال البابا "أمنيتي أن تسود الأخوة بين شعوب الأرض حتى وإن اختلفت بينها الأفكار والعقائد".
وعبر البابا عن أمله في أن يعود السلام الى ربوع كل من اليمن وسوريا وأن يتمكن الاسرائيليون والفلسطينيون من استئناف عملية السلام داعيا المجتمع الدولي الى بذل جهود أكبر لوضع حد للصراع في هذه المناطق العربية.
ويحل عيد الميلاد لهذا العام ومنطقة الشرق الأوسط تغوص في توترات داخلية وصراعات إقليمية. ففي لبنان يحتج مئات اللبنانيين في ساحة الشهداء وسط بيروت على أوضاع البلاد الاقتصادية المتردية، وتعطل الجهود المبذولة لتشكيل حكومة، والتي أدت إلى تضخم الاحتقان الشعبي لمستويات غير مسبوقة.
وفي سوريا حمل عيد الميلاد أملا في أن تشهد البلاد مخرجا من المأزق الحالي وأن يكون العام المقبل عام أمن وأمان على السوريين بجميع انتماءاتهم السياسية والعرقية والدينية.
وعلى العموم احتفل المسيحيون العرب بعيد الميلاد هذا العام وهم في حال أحسن مما كانوا عليه العام الماضي مع طرد تنظيم الدولة الاسلامية من سوريا والعراق وتطويق حركة ما تبقى من مقاتليها. لكن ما لم توضع نهاية لمأساة الحرب في سوريا واليمن فإن المخاطر ستظل تهدد المسيحيين والمسلمين العرب في المنطقة على حد سواء.
برأيك كيف احتفل المسيحيون العرب بعيد الميلاد هذا العام؟
هل تأثرت احتفالاتهم بالظروف السياسية والاقتصادية التي تعيشها المنطقة؟
إذا كنت من مسيحي العالم العربي هل أثرت الظروف المعيشية التي تمر بها بلدك في احتفالك بأعياد الميلاد؟
هل ثمة ما يشير الى أن أحوال المسيحيين في المنطقة العربية تحسنت عما كانت عليه؟
سنناقش معكم هذه المحاور وغيرها في حلقة الأربعاء 26 كانون الأول/ديسمبر من برنامج نقطة حوار الساعة  : جرينتش.
خطوط الاتصال تفتح قبل نصف ساعة من البرنامج على الرقم  .
إن كنتم تريدون المشاركة عن طريق الهاتف يمكنكم إرسال رقم الهاتف عبر الإيميل على

Wednesday, November 21, 2018

تصريح للنائب العام الإماراتي بشأن الحكم على المتهم البريطاني هيدجز

ولفت النائب العام الإماراتي، حسب وكالة الأنباء الإماراتية (وام)، إلى أن الحكم جاء "بعد أن اعترف المتهم أمام المحكمة بالتهم التي وجهتها إليه النيابة العامة بناء على أدلة قانونية أسفرت عنها التحقيقات القضائية التي أجرتها معه، واعترف خلالها تفصيليا بالجرائم التي ارتكبها في ظل ضمانات كاملة لحقوق المتهم أثناء إجراء تلك التحقيقات وفقا للدستور الإماراتي وقوانين الدولة، فضلا عن متابعة ممثلين لسفارة دولته".
وقال النائب العام الإماراتي في تصريح له بشأن الحكم في القضية رقم 96 لسنة 2018 جنايات أمن الدولة إن "المتهم مثل أمام هيئة المحكمة في حضور ممثلين عن السفارة البريطانية خلال جلسات المحاكمة السابقة واستنفد خلالها وسائل الدفاع كافة، وبعد أن أبدى محاميه كافة أوجه الدفاع التي رآها وبعد الرجوع للمتهم وهي إحدى الضمانات الدستورية لحق المتهم في محاكمة عادلة ونزيهة وشفافة طبقا لدستور وقوانين دولة الإمارات العربية المتحدة قررت المحكمة قفل باب المرافعة و حجز القضية للنطق بالحكم فيها لجلسة اليوم".
وأوضح أن "الحكم الذي صدر اليوم لا يعد حكما نهائيا، إذ يجوز للمتهم الطعن عليه أمام المحكمة الاتحادية العليا ويترتب على طعنه إعادة محاكمته مجددا؛ بما في ذلك بحث الأدلة ضده وكافة أوجه دفاعه والاستماع له ولمحاميه وهى إحدى أهم الضمانات لعدالة المحاكمات في دولة الإمارات العربية المتحدة وفقا لدستورها وقوانينها".
دبي، الإمارات العربية المتحدة ( )-- صرح المستشار الدكتور حمد سيف الشامسي، النائب العام لدولة الإمارات العربية المتحدة، بأن محكمة أبوظبي الاتحادية الاستئنافية نطقت، الأربعاء، بالحكم على المتهم ماثيو هيدجز، بريطاني الجنسية، بمعاقبته بالسجن المؤبد عن الاتهامات المنسوبة إليه.
ويضيف هانت إن الصراع قد تصاعد ليصبح "واحدا من أسوأ الكوارث الإنسانية في العالم"، داعيا مجددًا كلا الطرفين إلى البحث عن حل سياسي - بدلا من الحل العسكري.
لكنه أخبر مجلس العموم البريطاني أن المملكة المتحدة لن تنهي صفقات السلاح التي أبرمتها مع السعودية - وهي لاعب رئيسي في الحرب - لأنها ستنهي نفوذ بريطانيا في محادثات السلام.
وأوضح: "بعيداً عن مساعدتهم (المدنيين اليمنيين)، لم تكن هناك أي زيارة لوزير خارجية بريطانيا إلى السعودية قبل الأسبوع الماضي، ولا توجد فرصة لإجراء حوار صريح وأحيانًا صعب مع ولي العهد، ولا رحلة إلى طهران - لأن سببهم للتحدث معنا، أن لدينا علاقة مع السعوديين".
واستكمل هانت في رده على سؤال حول مبيعات الأسلحة البريطانية، بقوله: "لم يكن هناك أي دعم عبر الطاولة لقرار مجلس الأمن"، مضيفا: "لذا، فإن النفوذ البريطاني، بعيداً عن القدرة على الجمع بين الجانبين معاً، سوف يتراجع إلى الصفر".
ويضيف: "هذا هو السبب في أن الشيء الصحيح الذي ينبغي فعله فيما يتعلق بمبيعات الأسلحة هو اتباع نظام مراقبة الأسلحة الصارم... الذي لديه إجراءات موضوعية للتأكد من أننا لا نصدر الأسلحة إلى الأماكن التي يوجد فيها خطر كبير من الانتهاكات. وفق القانون الإنساني الدولي

Wednesday, October 3, 2018

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

इसमें वर्टिकल लॉन्चिंग सिस्टम होता है जिसे नेवी के मोबाइल प्लेटफॉर्म से दागा जा सकता है. इसमें सिंगल स्टेज एसएएम है जिसका अनुमानित रेंज 150 किलोमीटर है. कहा जा रहा है कि भारत को बिल्कुल आधुनिक एस-400 मिलेगा जिसमें उच्चस्तरीय एसएएम और  हैं.
मुख्य रूप से एस-400 में 40N6E एक मजबूत पक्ष है जो इसकी प्रतिष्ठा को और बढ़ाता है. एस-400 को बनाने वाली कंपनी अल्माज़-एंतये ग्रुप का कहना है कि 40N6E का अधिकतम रेंज 400 किलोमीटर है और यह 30 किलोमीटर की ऊंचाई पर अपने लक्ष्य को भेद सकता है.
हालांकि अभी तक यह साफ़ नहीं है कि रूस-भारत में अगर ये रक्षा सौदा फाइनल हो जाता है तो कब तक एस-400 भारत आ जाएगा. रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि एस-400 के आने से भारतीय सेना की ताक़त बढ़ेगी.
इंस्टीट्यूट फोर डिफेंस स्टडीज एंड एनलिसिस के लक्ष्मण कुमार बेहरा इस रक्षा सौदे के बारे में कहते हैं, ''रूस चीन को एस-400 ट्रिम्फ़ पहले ही दे चुका है. इसके बाद से भारत रूस के साथ इस रक्षा सौदे को अंजाम तक पहुंचाने में लग गया था. यह बहुत ख़ास रक्षा सौदा है और मुझे लगता है कि भारत इसे हासिल करने में अमरीका के सामने नहीं झुकेगा.''
रक्षा विशेषज्ञ राहुल बेदी का कहना है कि भारतीय सेना के लिए यह बहुत ही अहम समझौता है. वो कहते हैं, ''भारत को अगर एस-400 हासिल करना है तो अमरीका को नाराज़ करना ही होगा. चीन ने भी रूस से एस-400 ख़रीदा तो अमरीका ने प्रतिबंध लगा दिया. भारत को अमरीका इस मामले में राहत देगा, ऐसा नहीं लगता है. चीन पर अमरीका ने प्रतिबंध लगाया तो उस पर बहुत असर नहीं पड़ा, लेकिन भारत बुरी तरह से प्रभावित होगा.''
भारतीय सेना के पास एस-400 आने के बाद क्या पाकिस्तान की चिंता बढ़ जाएगी? इस सवाल के जवाब में राहुल बेदी कहते हैं, ''पाकिस्तान के लिए ये बहुत ही चिंताजनक है. एस-400 आने के बाद भारत पाकिस्तान पर और भारी पड़ जाएगा. दरअसल भारत ने अमरीका से हथियारों की ख़रीद शुरू की तो पाकिस्तान और रूस के बीच रक्षा संबंध बढ़ने लगे थे. ऐसे में भारत को डर था कि कहीं पाकिस्तान को रूस एस-400 ना दे दे. भारत ने रूस के साथ इस सौदे में ये शर्त भी रखी है कि वो पाकिस्तान को एस-400 नहीं देगा.''
राहुल बेदी कहते हैं, ''पाकिस्तान को अगर रूस-400 नहीं देता है तो उसे इसका कोई विकल्प भी नहीं मिलेगा. मुझे नहीं लगता कि यूरोप या अमरीका इसके जवाब कोई एयर डिफेंस सिस्टम देगा. हालांकि पाकिस्तान के पास इतने पैसे भी नहीं हैं कि वो इसे ख़रीद पाएगा. भारत और रूस पर अमरीका का दबाव अब बहुत काम नहीं करेगा. ऐसा इसलिए क्योंकि दोनों देशों ने पिछले दो-तीन महीनों में रुपए और रूबल में कारोबार करना शुरू कर दिया है. ऐसा भारत सोवियत संघ से 1960 के दशक में भी करता था. इस सौदे के लिए सितंबर महीने में चार करोड़ डॉलर दिया जा चुका है.
रूस के साथ इस सौदे में टेक्नॉलजी ट्रांसफर यानी 30 फ़ीसदी ऑफसेट पार्टनर जैसी बात नहीं है. राहुल बेदी कहते हैं, ''रूस ने इस पर कहा था कि अगर टेक्नॉलजी ट्रांसफर जैसी बात आएगी तो डिलिवरी में देरी होगी और क़ीमत भी बढ़ जाएगी.'' बेदी मानते हैं कि एस-400 बेहतरीन एयर डिफेंस सिस्टम है और इससे बेहतर दुनिया में अभी कोई एयर डिफेंस सिस्टम नहीं है.
रूस की सरकारी न्यूज़ एजेंसी स्पूतनिक ने अपनी एक रिपोर्ट में लिखा है कि ऐसी कई वजहें हैं जो अमरीका को भारत और रूस के इस रक्षा सौदे को रोकने पर मजबूर कर रहा है. स्पूतनिक ने रक्षा विश्लेषकों से बातचीत के बाद अपनी रिपोर्ट में लिखा है, ''अमरीका को लगता है कि अगर भारत एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम को हासिल कर लेगा तो उसके सहयोगी देश क़तर, सऊदी और तुर्की भी रूस से इसके लिए संपर्क करेंगे और उसका हथियार कारोबार प्रभावित होगा.''
स्पूतनिक की रिपोर्ट में कहा गया है, ''भारत के एस-400 हासिल करने से पाकिस्तान और चीन की ताक़त प्रभावित होगी. इससे भारत पाकिस्तान की हवाई पहुंच और ख़ासकर लड़ाकू विमान, क्रूज़ मिसाइल और ड्रोन्स के ख़तरे को नाकाम कर देगा. ऐसा इसलिए है क्योंकि इसका ट्रैकिंग रेंज 600 किलोमीटर है और 400 किलोमीटर तक मार कर गिराने की क्षमता है. केवल तीन एस-400 में ही पाकिस्तान की सभी सीमाओं की निगरानी की जा सकती है.''

Tuesday, September 11, 2018

在饲料中添加三聚氰胺是“公开的秘密”

据《美联社》引据中国媒体报道,在动物饲料中添加工业化学品三聚氰胺,使饲料的蛋白质值显示增高是一种常见的做法,在行业内是“公开的秘密”。这种说法暗示出最新中国食品丑闻涵盖范围可能远远不止污染的牛奶和鸡蛋。

《南方日报》首先报道了这一实情,然后《新华社》和《人民日报》网站对此进行转载。中国媒体如此大规模报道食品丑闻是罕见的,而中央政府似乎对这一问题的普遍存在表示默许。

在受污染的牛奶和奶粉事件之后, 至少在四个品牌的中国鸡蛋中发现有化肥和塑料中常用的高剂量三聚氰胺--母鸡被认为喂养了被污染的饲料。之前,“毒奶粉”使成千上万名中国儿童患病,并与四名婴儿的死亡有关。

虽然在食物中故意添加三聚氰胺在中国是非法的,但是该化学品的广泛使用表明当局对此难以控制。《南方日报》报道说,近年来,它已被重新包装然后作为“蛋白精”销售。中国卫生官员已承诺在今后食品生产中执行更严格的标准。
据《路透社》报道,世界各国科学家第一次能够直接找到南极和北极的冰川融化与人类活动产生的温室气体排放有关。同时,该研究也强调冰床消失对预期的下世纪海平面上升的影响需得到更多认识。

 来自英国东英吉利亚大学的弥敦道吉列说:“我们首次能够把北极和南极变暖直接归咎于人类活动”。与英国,日本和美国的同事一起,他领导的该研究发表在《自然—地球科学》杂志。 sex

联合国气候专家小组在2007年得出结论,即人类活动产生的温室气体的影响已经“在除南极洲以外的各大洲都可找到” ,但由于观测条件有限,对南极洲影响的评估未能顺利进行。这项新研究对此结论作进一步延伸,填补了对南极洲影响评估的空白。结论为,两极地区变暖最好是由主要来自燃烧化石燃料产生的形成了的温室气体解释,而不是由自然变化产生的温室气体。

联合国气候专家小组预测海平面在本世纪将上升18至59厘米,这将可能导致更多的干旱,洪水,热浪和破坏性的风暴。
据《卫报》报道石油产业组织在一报告中警告,在未来五年内,英国可能遭受日益下降的石油供应的冲击, 既而对英国经济造成潜在毁灭性的影响。

这份题为"石油危机"的报告是由石油产业组织发表,该组织由来自运输, 工程,建筑和能源部门的8个企业构成。该报告认为, 英国因石油产量过早达到顶峰后产量减少带来的危机,比恐怖袭击,天然气短缺或全球气候变暖短期影响产生的威胁更大。

"石油峰值"论已经持续数年。虽然一些国家政府和石油公司坚持认为, 原油生产能够满足未来数十年日益增长的需求,但其他一些包括许多石油专家认为,石油产量顶峰即将来临。

这份报告的观点与英国政府的立场有很大不同。新设立的能源与气候变化部的一份声明表明: "政府的评估为全球已知石油储量大于至少到2030年的累计产量,以满足 不断增长的需求。这与国际能源机构在其2007世界能源展望中作出的评估是一致的, 都认为全球石油资源在可遇见的未来内是足够的。"

Tuesday, September 4, 2018

राहुल गांधी की भारतीय नागरिकता और पार्टी के नाम को लेकर केस दाखिल, जानें क्‍या है पूरा मामला

बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित एक अदालत में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की भारतीय नागरिकता तथा उनकी पार्टी के नाम को लेकर मंगलवार को एक परिवाद पत्र दायर किया गया. वकील सुधीर कुमार ओझा ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट आरती कुमारी सिंह की अदालत में गांधी की भारतीय नागरिकता तथा उनकी पार्टी के नाम को लेकर एक परिवाद पत्र दायर किया.
ओझा ने गांधी पर भारतीय और इतालवी पासपोर्ट रखने तथा उक्त यूरोपीय देश में आयोजित एक चुनाव में मतदान करने का भी आरोप लगाया है. उन्होंने दावा किया कि गांधी की पार्टी का वास्तविक नाम "इंदिरा कांग्रेस इंडिया" है और उन्होंने "इंडियन नेशनल कांग्रेस" के नाम का उपयोग कर राष्ट्र के साथ धोखा किया है.    उन्होंने अदालत से मामले की जांच का आदेश देने का आग्रह किया है.    इससे पहले गत 25 अगस्त को ओझा ने गांधी पर अपने विदेशी दौरे के क्रम में एक बयान देकर देश की छवि धूमिल करने का आरोप लगाते हुए उनपर मानहानि का एक परिवाद पत्र दायर किया था.  

वहीं कांग्रेस पर राजनीतिक अवसरवादिता के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता करने का आरोप लगाते हुए भाजपा ने मंगलवार को आरोप लगाया कि संप्रग शासनकाल के दौरान सोनिया गांधी की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (एनएसी) ‘‘नक्सलियों के लिए समर्थन का आधार’’ थी और पार्टी के कुछ नेताओं ने नक्सलवाद का ‘‘महिमामंडन’’ किया. कांग्रेस के खिलाफ आरोपों की बौछार करते हुए भाजपा ने ‘‘नक्सलियों से संबंध’’ रखने वाले लोगों को दिग्विजय सिंह एवं जयराम रमेश जैसे वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं के कथित समर्थन पर भी सवाल उठाए. भाजपा के इन आरोपों पर कांग्रेस ने अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.

हरियाणा की बांकी छोरी सपना चौधरी (  ने नया धमाका कर दिया है. सपना चौधरी का सोशल मीडिया पर एक वीडियो खूब धमाल मचा रहा है. इस वीडियो में भोजपुरी ( )-बॉलीवुड ( )-हरियाणा ( )-पंजाबी ( ) सिनेमा में हंगामा बरपा चुकीं सपना कमाल की लग घबराइए मत, स

पना चौधरी ने असल जिंदगी में किसी को धोखा नहीं दिया है. बल्कि ये फुटेज उनके म्यूजिक वीडियो का है जिसमें वे बहुत ही बिंदास अंदाज में नजर आ रही हैं. इस सॉन्ग में सपना चौधरी का स्वैग भी बहुत ही कमाल का है. फिर हेलीकॉप्टर और फरारी जैसी चीजें तो हैं ही, लेकिन ये गाना भी कोई कम मस्त नहीं है. सपना चौधरी के हिट सॉन्ग्स की तरह यह सॉन्ग भी कमाल का है.  सपना चौधरी का जन्म हरियाणा के रोहतक में हुआ था. जब सपना 18 साल की थी तो उनके पिता का निधन हो गया था. फिर वे ऑर्केस्ट्रा पार्टी के साथ जुड़ गईं. सपना ने अपने पहले गाने 'सॉलिड बॉडी रै' से ऐसा हंगामा बरपाया कि उन्हें कभी पीछे मुड़कर देखने का मौका नहीं मिला.  सपना चौधरी भोजपुरी सिनेमा के अलावा पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री में भी दस्तक दे चुकी हैं. रही हैं और उनका अंदाज काफी मॉडर्न भी है. इस वीडियो में  पूरे स्वैग में हेलीकॉप्टर से उतरती हैं और लाल फरारी में सवार होकर हवा हो जाती हैं. दिलचस्प यह है कि उनको प्रेम करने वाला आशिक वहां टूव्हीलर लेकर आया होता है, लेकिन अब सपना चौधरी चेतक पर कहां बैठने वाली.बॉलीवुड फिल्म 'नानू की जानू' में भी सपना चौधरी स्पेशल सॉन्ग में नजर आई थीं, फिल्म तो फ्लॉप रही लेकिन उनका गाना खूब चला. सपना चौधरी ने बिग बॉस-11 से लोकप्रियता की बुलंदियों को छुआ और उसके बाद से वे देश भर में सनसनी बनी हुई हैं. 'बिग बॉस' में सपना चौधरी की टीवी एक्ट्रेस हिना खान के साथ खूब पटी थी, 

और उनकी अच्छी ट्यूनिंग रही थी

Saturday, September 1, 2018

中国大豆需求让巴西不堪重负

巴西近来发现,要做中国的粮仓并非易事。这个南美大国的基础设施在中国需求的重压之下已经嘎吱作响,而且巴西已经开始明白如果不能满足中国的需要会有怎样的后果。

过去二十年中,中国对农业大宗商品的需求飞速飙升,并因此开始放眼海外。1995年,中国大豆产量和消费量均为1400万吨。2011年,中国大豆产量仍为1400万吨,但消费量已经升至7000万吨,也就是说有5600万吨大豆要靠进口。

这5600万吨中有很大一部分来自大豆产量占世界27%的巴西。今年,巴西大豆产量达到了创纪录的8300万吨。过去二十年中,巴西大豆产量的增长对环境产生了很大的影响。卡洛斯·雷柏拉蒂教授接受中外对话采访时表示:

“大豆产量的增长主要有两方面影响。一是单作造成土壤退化,二是为了增加大豆产量而间接造成的毁林。第一点与大豆的价格优势有关,也就是说生产者都选择种大豆而不种其他作物。因为大豆种植而毁林的速度近年来有所减缓,不过仍然没有彻底停止。”

巴西能否应对?

除了环境破坏之外还有一个威胁:如此大量出口大豆和其他农产品的压力将压垮巴西的基础设施。正如蒂西安·罗西在《大纪元时报》中写道,巴西并未从日益增加的收成中获得什么好处。

“根据巴西国家粮食公司的调查,大豆种植面积比去年增长了10.4%。但是该研究也表明,受物流条件限制,出口量较前一年有所下降。”

出口下降,运输成本增加,原因很大一部分在于通往港口的道路前所未有地挤满了载货卡车。去往桑托斯港的卡车排成30公里的长队是家常便饭,司机往往要在几乎静止不动的长龙中等待超过24小时。

评论家埃米利亚诺·加利在阿根廷报纸《国家报》中撰文指出,巴西目前正面临着至关重要的历史拐点。

巴西正站在十字路口:大豆产量的增长造成的物流系统崩溃如今正使巴西面临作茧自缚的危险。短期之内,前往码头的千米长龙以及以周计算的等待装船时间将成为“另一个巴西”最鲜活的形象。

咨询集团中心的古斯塔夫·塞格雷预计,如果巴西接下来两年经济增长5%,那么该国的物流系统将彻底崩溃。“基础设施短缺造成的物流成本每年超过92亿美元,占GDP的10.6%,”他说。

巴西政府已经制定了一份长达30年、总计投资1000亿美元的计划,希望动员私营部门的力量建造现代化的公路、铁路和港口。但巴西政府2012年创立的巴西规划和基础设施公司认为,政府的投资要比计划的翻一番才能达到目标。

与此同时,巴西还要提防引起中国这个最大客户的不悦。今年三月中旬,中国取消了一份60万吨的大豆订单,原因就是巴西方面未能如期交货。中国近期还推迟了批准一笔转基因大豆的订单。

报告认为,中国方面迟早会批准这笔订单,而此次的推迟不过是政府换届造成的技术问题。尽管如此,此次的推迟已经突显出中国对巴西农业政策的强大影响力。

Tuesday, August 28, 2018

क दो साल तो सब ठीक रहा लेकिन बीते साल जब बड़ी

बड़ी बेटी माधुरी को याद करते हुए वह कहते हैं, “वो लड़की नहीं, लड़का थी मेरा! खेती में कंधे से कंधा मिलाकर मेरा साथ देती. बीज लगाने से लेकर रोपाई हो, दवा का छिड़काव या कपास चुनना हो. सारा काम करती थी. उसने मुझे कभी महसूस नहीं होने दिया कि वो मेरी परेशानियों से परेशान है. हमेशा मेरी हिम्मत बँधाती. कहती थी कि पापा सब ठीक हो जाएगा. पर घर के हालात तो सब उसके सामने ही थे.”
इतने कहते-कहते भास्कर फफक फफककर रोने लगते हैं.
इस परिवार के पास अपनी एक एकड़ ज़मीन है. पर उससे गुज़ारा न हो पाने के कारण भास्कर हर साल ज़मीन किराए पर लेकर खेती किया करते थे.
“मैं बरसात और सर्दियों में 4-5 एकड़ ज़मीन मगते (किराए) पर लेकर खेती करता हूं. इस तरह साल में 10 से 12 एकड़ ज़मीन का किराया भरना पड़ता है. एक दो साल तो सब ठीक रहा लेकिन बीते साल जब बड़ी बेटी की शादी करनी थी, तभी सारी फ़सल ख़राब हो गयी”.
भास्कर ने खेती के लिए साहूकारों से लेकर माइक्रो फ़ाइनेंस कंपनियों तक से कर्ज़ा लिया. ज़मीन किराए पर ली. फिर मज़दूरों, कीटनाशक और खाद पानी का ख़र्च मिलकर उनके 1.5 लाख रुपये निवेश में लग गए.
“दाम ठीक नहीं मिला. फ़सल निकली तो सिर्फ़ 90 हज़ार मिले 6 एकड़ में उपजी मूँगफली की फ़सल के. मुझे 90 हज़ार का नुक़सान हो गया. फिर भी हमने अगले मौसम में हिम्मत करके कपास उगाया. फ़सल अच्छी हुई लेकिन ठीक काटने से पहले उसमें बोंदड़ी (पिंक पेस्ट नामक कपास में लगने वाला कीड़ा) लग गयी. हमारी खड़ी फ़सल ख़राब हो गयी”.
दो-दो फ़सलें ख़राब होने के बाद भास्कर के घर में उदासी छा गयी. लगातार रोने से उनकी लाल हो चुकी आँखों में अब भी आंसू भरे थे. “हम मेहनत करने वाले किसान हैं मैडम. शरीर तोड़ मेहनत करते हैं, फिर भी कर्ज़ लेना पड़ा. एक तो कर्ज़ा देने वाले घर आने लगे और दूसरी तरफ़ फ़सलें ख़राब हो गईं. दाम नहीं मिले. घाटा लग गया और एक के बाद एक मेरे दो बच्चों ने आत्महत्या कर ली. जब मेरे बच्चे मरे, तब हम पर ढाई लाख का कर्ज़ा था. इसलिए इस साल दुखी होकर मैंने कोई फ़सल ही नहीं उगाई”.
भास्कर का परिवार खेती में होने वाले नुकसान का किसान परिवार पर पड़ने वाले दीर्घकालिक प्रभावों का सटीक उदाहरण हैं. खेती में नुक़सान के बेटियों की शादी पर पड़े प्रभाव के बारे में बताते हुए वह कहते हैं, “बड़ी बेटी को देखने रिश्ते वाले मेहमान आते रहते थे. कई बार बात तय भी हो जाती लेकिन हम हमेशा क़र्ज़ में डूबे रहते. कुछ नहीं तो मेहमानों को सदा भोजन करवाकर बेटी को एक जोड़ी कपड़ों में तो विदा करना ही था. इतने भी पैसे नहीं बनते थे. कहां से करते शादी?
रिश्तेदार सब कहने लगे थे कि दो-दो जवान बेटियां घर में हैं. मेरी बच्चियाँ सब सुनती थीं पर कभी हमें एहसास नहीं होने दिया कि वो परेशान हैं. बस एक दिन अचानक चली गयीं”.
देवकू और भास्कर के दो बेटे हैं लेकिन खेती और घर से जुड़ा सारा आर्थिक व्यवहार स्वाति ही संभालती थी. परिवार बेटों को पढ़ा लिखा कर अपने पैरों पर खड़ा करना चाहता था इसलिए वह खेती में कभी शामिल नहीं हुए.
परिवार के लोग बताते हैं कि माधुरी और स्वाति में बहुत प्यार था. बड़ी बहन के जाने के बाद स्वाति सदमे में रहने लगी.
“स्वाति स्कूल ख़त्म कर आगे डिप्लोमा की पढ़ाई करने वाली थी. फ़िलहाल घर में सबसे पढ़ी लिखी वही थी. इसलिए सारा व्यवहार वही रखती. किसका कितना कर्ज़ा है, किसको कितना उधार चुकाना है – सब उसे मालूम था. मैं जो भी कमाता, सारे पैसे उसी के हाथ में देता. उसकी भी शादी की बात चल रही थी लेकिन पैसों की वजह से शादी तय नहीं हो पा रही थी.
माधुरी के बाद उसपर काम का बोझ भी बढ़ गया. खेतों में काम भी करती, घर का काम भी और हिसाब किताब भी. वो परेशान तो थी पर इतना टूट जाएगी की ख़ुद अपनी जान ले लेगी, ऐसा हमने सपने में भी नहीं सोचा था.”
माधुरी और स्वाति की मौत के बाद तिवसा के तहसीलदार भास्कर के घर आए थे. वह मौत की तारीखें और दूसरी ज़रूरी जानकारियां भी नोट करके ले गए लेकिन उन्हें अब तक कोई मुआवज़ा नहीं मिला है.
भास्कर के बेटे सागर का मानना है कि भारत के किसानों को अब खेती छोड़ देनी चाहिए. चेहरे पर किसी उजड़े शहर जैसे उदासी लिए वह कहते हैं, “हमारी बहनें हमें माँ से भी ज़्यादा प्यार करती थीं.
लेकिन खेती में हुए नुक़सान और कर्ज़ की वजह से उन्होंने सुसाइड कर लिया. इस देश में किसानों की कोई इज़्ज़त ही नहीं है. 70 हज़ार ज़मीन में डालो तब 45 हज़ार वापस मिलता है. हर फ़सल पर इतना नुकसान किसान कैसे सहेगा? ऐसे आत्महत्या करके मरने से तो अच्छा है कि किसान खेती करना ही छोड़ दें.”
आंकड़े बताते हैं कि महाराष्ट्र में वक़्त के साथ किसानों के हालात बद से बदतर ही हुए हैं. सरकारी आँकड़ों के अनुसार, बीते दो दशकों में इस राज्य के 60 हज़ार से ज़्यादा किसान आत्महत्या कर चुके हैं. इस साल के शुरुआती 3 महीनों में ही महाराष्ट्र में तक़रीबन 700 किसान बढ़ते क़र्ज़ और खेती में नुकसान के चलते अपनी जान दे चुके हैं.
राज्य के विदर्भ और मराठवाड़ा इलाके 1995 से ही किसानों की आत्महत्या का भौगोलिक केंद्र रहे हैं.
शेंदुरजना गांव से 10 किलोमीटर दूर स्थित तहसीलदार के दफ़्तर में मुख्य अधिकारी राम. ए. लंके स्वाति और माधुरी के बारे में पूछे जाने पर व्यंग्य भरे लहजे में मुस्कुराते हुए कहते हैं, “यहां लोग अपने निजी या पारिवारिक कारणों से आत्महत्या करते हैं. यह सब मीडिया की फैलाई हुई बातें हैं. वरना असल में कर्ज़ और किसानों की आत्महत्या में कोई संबंध नहीं.”
दोबारा कुरेद कर शेंदुरजना की दो बहनों के बारे में पूछने पर वह फ़ाइलें मंगवाकर देखते हैं. वो कहते हैं, “माधुरी को किसान साबित करने के लिए ज़रूरी साक्ष्य मौजूद नहीं थे इसलिए उसके मामले में हम कोई मुआवज़ा नहीं दे सके. लेकिन स्वाति को किसान माना गया है. उनके परिवार को जल्दी ही स्वाति के नाम पर जारी 1 लाख का सरकारी मुआवज़ा दिया जाएगा.”
स्थानीय पत्रकारों से बात करने पर यह भी मालूम चला कि माधुरी की आत्महत्या को एक काल्पनिक प्रेम प्रसंग से जोड़ कर गांव में उड़ाई गई झूठी बेबुनियाद अफ़वाहों ने भी ‘माधुरी को किसान न मानने’ के सरकारी महकमे के निर्णय को प्रभावित करने में अपनी भूमिका निभाई.
तहसीलदार के दफ़्तर से निकलते हुए मुझे अचानक भास्कर की बिलखती ज़बान से पूछा गया वह सवाल याद आ गया जिसने मुझे भी भीतर तक झकझोर दिया था.
“जब मेरी बड़ी बेटी सारी ज़िंदगी दिन-रात मेरे साथ खेतों में काम करती रही, तब भी सरकार ने उसकी आत्महत्या को किसान की आत्महत्या क्यों नहीं माना? अगर उसके मरने के बाद हमें समय पर मुआवज़ा मिल गया होता तो शायद मेरी छोटी बेटी की जान बच सकती थी.”
अमरावती से आगे बढ़ते ही हम यवतमाल पहुंचे. यह समय का व्यंग्य ही है कि महाराष्ट्र का जो यवतमाल ज़िला बीते 2 दशकों से किसान आत्महत्याओं से जूझ रहा है, उसी जिले में जन्मे वसंतराव नाइक न सिर्फ़ 12 वर्षों तक राज्य के मुख्यमंत्री रहे बल्कि देश में हरित क्रांति के जनक के तौर पर भी पहचाने गए.
अमरावती से यवतमाल के रास्ते में मुझे अक्सर छोटे छोटे गांवों में आज भी शिवाजी के साथ टंगे वसंतराव नाइक की तस्वीरें दिखाई दे जाती. तब एक ख़याल मन में अक्सर उठता, किसने सोचा था कि यवतमाल की जिस हरी-भरी धरती को नाइक किसानों का स्वर्ग बनाना चाहते थे, वही यवतमाल एक दिन किसानों की क़ब्रगाह के नाम से पहचाना जाएगा.
यवतमाल के पिपरी बुट्टी गांव में अब तक 42 किसान कर्ज़ और खेती में हुए माली नुकसान की वजह से आत्महत्या कर चुके हैं. यहीं रहने वाले 30 वर्षीय मोहन प्रहलाद तज़ाणे का घर पहली बार में आपकी नज़र से छूट सकता है. दो बदरंग से कच्चे-पक्के मकानों के बीच मौजूद प्रह्लाद के एक कमरे के छोटे से घर की कच्ची दीवारें इतनी टूटी और जर्जर हैं कि पहली नज़र में आप उसे किसी बड़े मकान का ढह चुका हिस्सा समझ कर आगे बढ़ जाएँगे.
लेकिन घर के भीतर कदम रखते ही गोबर से रंगी गयी कमरे की कच्ची दीवारें, धूल में लिपटे चंद बर्तन और कमरे के बीच में पड़ा एक टूटा बिस्तर – यहां मरने और जीने वालों की तकलीफ़ों भरी ज़िंदगी की गवाही पेश करते हैं.