इसमें वर्टिकल लॉन्चिंग सिस्टम होता है जिसे नेवी के मोबाइल प्लेटफॉर्म
से दागा जा सकता है. इसमें सिंगल स्टेज एसएएम है जिसका अनुमानित रेंज 150
किलोमीटर है. कहा जा रहा है कि भारत को बिल्कुल आधुनिक एस-400 मिलेगा
जिसमें उच्चस्तरीय एसएएम और हैं.
मुख्य रूप से एस-400 में 40N6E एक मजबूत पक्ष है जो इसकी प्रतिष्ठा को और बढ़ाता है. एस-400 को बनाने वाली कंपनी अल्माज़-एंतये ग्रुप का कहना है कि 40N6E का अधिकतम रेंज 400 किलोमीटर है और यह 30 किलोमीटर की ऊंचाई पर अपने लक्ष्य को भेद सकता है.
हालांकि अभी तक यह साफ़ नहीं है कि रूस-भारत में अगर ये रक्षा सौदा फाइनल हो जाता है तो कब तक एस-400 भारत आ जाएगा. रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि एस-400 के आने से भारतीय सेना की ताक़त बढ़ेगी.
इंस्टीट्यूट फोर डिफेंस स्टडीज एंड एनलिसिस के लक्ष्मण कुमार बेहरा इस रक्षा सौदे के बारे में कहते हैं, ''रूस चीन को एस-400 ट्रिम्फ़ पहले ही दे चुका है. इसके बाद से भारत रूस के साथ इस रक्षा सौदे को अंजाम तक पहुंचाने में लग गया था. यह बहुत ख़ास रक्षा सौदा है और मुझे लगता है कि भारत इसे हासिल करने में अमरीका के सामने नहीं झुकेगा.''
रक्षा विशेषज्ञ राहुल बेदी का कहना है कि भारतीय सेना के लिए यह बहुत ही अहम समझौता है. वो कहते हैं, ''भारत को अगर एस-400 हासिल करना है तो अमरीका को नाराज़ करना ही होगा. चीन ने भी रूस से एस-400 ख़रीदा तो अमरीका ने प्रतिबंध लगा दिया. भारत को अमरीका इस मामले में राहत देगा, ऐसा नहीं लगता है. चीन पर अमरीका ने प्रतिबंध लगाया तो उस पर बहुत असर नहीं पड़ा, लेकिन भारत बुरी तरह से प्रभावित होगा.''
भारतीय सेना के पास एस-400 आने के बाद क्या पाकिस्तान की चिंता बढ़ जाएगी? इस सवाल के जवाब में राहुल बेदी कहते हैं, ''पाकिस्तान के लिए ये बहुत ही चिंताजनक है. एस-400 आने के बाद भारत पाकिस्तान पर और भारी पड़ जाएगा. दरअसल भारत ने अमरीका से हथियारों की ख़रीद शुरू की तो पाकिस्तान और रूस के बीच रक्षा संबंध बढ़ने लगे थे. ऐसे में भारत को डर था कि कहीं पाकिस्तान को रूस एस-400 ना दे दे. भारत ने रूस के साथ इस सौदे में ये शर्त भी रखी है कि वो पाकिस्तान को एस-400 नहीं देगा.''
राहुल बेदी कहते हैं, ''पाकिस्तान को अगर रूस-400 नहीं देता है तो उसे इसका कोई विकल्प भी नहीं मिलेगा. मुझे नहीं लगता कि यूरोप या अमरीका इसके जवाब कोई एयर डिफेंस सिस्टम देगा. हालांकि पाकिस्तान के पास इतने पैसे भी नहीं हैं कि वो इसे ख़रीद पाएगा. भारत और रूस पर अमरीका का दबाव अब बहुत काम नहीं करेगा. ऐसा इसलिए क्योंकि दोनों देशों ने पिछले दो-तीन महीनों में रुपए और रूबल में कारोबार करना शुरू कर दिया है. ऐसा भारत सोवियत संघ से 1960 के दशक में भी करता था. इस सौदे के लिए सितंबर महीने में चार करोड़ डॉलर दिया जा चुका है.
रूस के साथ इस सौदे में टेक्नॉलजी ट्रांसफर यानी 30 फ़ीसदी ऑफसेट पार्टनर जैसी बात नहीं है. राहुल बेदी कहते हैं, ''रूस ने इस पर कहा था कि अगर टेक्नॉलजी ट्रांसफर जैसी बात आएगी तो डिलिवरी में देरी होगी और क़ीमत भी बढ़ जाएगी.'' बेदी मानते हैं कि एस-400 बेहतरीन एयर डिफेंस सिस्टम है और इससे बेहतर दुनिया में अभी कोई एयर डिफेंस सिस्टम नहीं है.
रूस की सरकारी न्यूज़ एजेंसी स्पूतनिक ने अपनी एक रिपोर्ट में लिखा है कि ऐसी कई वजहें हैं जो अमरीका को भारत और रूस के इस रक्षा सौदे को रोकने पर मजबूर कर रहा है. स्पूतनिक ने रक्षा विश्लेषकों से बातचीत के बाद अपनी रिपोर्ट में लिखा है, ''अमरीका को लगता है कि अगर भारत एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम को हासिल कर लेगा तो उसके सहयोगी देश क़तर, सऊदी और तुर्की भी रूस से इसके लिए संपर्क करेंगे और उसका हथियार कारोबार प्रभावित होगा.''
स्पूतनिक की रिपोर्ट में कहा गया है, ''भारत के एस-400 हासिल करने से पाकिस्तान और चीन की ताक़त प्रभावित होगी. इससे भारत पाकिस्तान की हवाई पहुंच और ख़ासकर लड़ाकू विमान, क्रूज़ मिसाइल और ड्रोन्स के ख़तरे को नाकाम कर देगा. ऐसा इसलिए है क्योंकि इसका ट्रैकिंग रेंज 600 किलोमीटर है और 400 किलोमीटर तक मार कर गिराने की क्षमता है. केवल तीन एस-400 में ही पाकिस्तान की सभी सीमाओं की निगरानी की जा सकती है.''
मुख्य रूप से एस-400 में 40N6E एक मजबूत पक्ष है जो इसकी प्रतिष्ठा को और बढ़ाता है. एस-400 को बनाने वाली कंपनी अल्माज़-एंतये ग्रुप का कहना है कि 40N6E का अधिकतम रेंज 400 किलोमीटर है और यह 30 किलोमीटर की ऊंचाई पर अपने लक्ष्य को भेद सकता है.
हालांकि अभी तक यह साफ़ नहीं है कि रूस-भारत में अगर ये रक्षा सौदा फाइनल हो जाता है तो कब तक एस-400 भारत आ जाएगा. रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि एस-400 के आने से भारतीय सेना की ताक़त बढ़ेगी.
इंस्टीट्यूट फोर डिफेंस स्टडीज एंड एनलिसिस के लक्ष्मण कुमार बेहरा इस रक्षा सौदे के बारे में कहते हैं, ''रूस चीन को एस-400 ट्रिम्फ़ पहले ही दे चुका है. इसके बाद से भारत रूस के साथ इस रक्षा सौदे को अंजाम तक पहुंचाने में लग गया था. यह बहुत ख़ास रक्षा सौदा है और मुझे लगता है कि भारत इसे हासिल करने में अमरीका के सामने नहीं झुकेगा.''
रक्षा विशेषज्ञ राहुल बेदी का कहना है कि भारतीय सेना के लिए यह बहुत ही अहम समझौता है. वो कहते हैं, ''भारत को अगर एस-400 हासिल करना है तो अमरीका को नाराज़ करना ही होगा. चीन ने भी रूस से एस-400 ख़रीदा तो अमरीका ने प्रतिबंध लगा दिया. भारत को अमरीका इस मामले में राहत देगा, ऐसा नहीं लगता है. चीन पर अमरीका ने प्रतिबंध लगाया तो उस पर बहुत असर नहीं पड़ा, लेकिन भारत बुरी तरह से प्रभावित होगा.''
भारतीय सेना के पास एस-400 आने के बाद क्या पाकिस्तान की चिंता बढ़ जाएगी? इस सवाल के जवाब में राहुल बेदी कहते हैं, ''पाकिस्तान के लिए ये बहुत ही चिंताजनक है. एस-400 आने के बाद भारत पाकिस्तान पर और भारी पड़ जाएगा. दरअसल भारत ने अमरीका से हथियारों की ख़रीद शुरू की तो पाकिस्तान और रूस के बीच रक्षा संबंध बढ़ने लगे थे. ऐसे में भारत को डर था कि कहीं पाकिस्तान को रूस एस-400 ना दे दे. भारत ने रूस के साथ इस सौदे में ये शर्त भी रखी है कि वो पाकिस्तान को एस-400 नहीं देगा.''
राहुल बेदी कहते हैं, ''पाकिस्तान को अगर रूस-400 नहीं देता है तो उसे इसका कोई विकल्प भी नहीं मिलेगा. मुझे नहीं लगता कि यूरोप या अमरीका इसके जवाब कोई एयर डिफेंस सिस्टम देगा. हालांकि पाकिस्तान के पास इतने पैसे भी नहीं हैं कि वो इसे ख़रीद पाएगा. भारत और रूस पर अमरीका का दबाव अब बहुत काम नहीं करेगा. ऐसा इसलिए क्योंकि दोनों देशों ने पिछले दो-तीन महीनों में रुपए और रूबल में कारोबार करना शुरू कर दिया है. ऐसा भारत सोवियत संघ से 1960 के दशक में भी करता था. इस सौदे के लिए सितंबर महीने में चार करोड़ डॉलर दिया जा चुका है.
रूस के साथ इस सौदे में टेक्नॉलजी ट्रांसफर यानी 30 फ़ीसदी ऑफसेट पार्टनर जैसी बात नहीं है. राहुल बेदी कहते हैं, ''रूस ने इस पर कहा था कि अगर टेक्नॉलजी ट्रांसफर जैसी बात आएगी तो डिलिवरी में देरी होगी और क़ीमत भी बढ़ जाएगी.'' बेदी मानते हैं कि एस-400 बेहतरीन एयर डिफेंस सिस्टम है और इससे बेहतर दुनिया में अभी कोई एयर डिफेंस सिस्टम नहीं है.
रूस की सरकारी न्यूज़ एजेंसी स्पूतनिक ने अपनी एक रिपोर्ट में लिखा है कि ऐसी कई वजहें हैं जो अमरीका को भारत और रूस के इस रक्षा सौदे को रोकने पर मजबूर कर रहा है. स्पूतनिक ने रक्षा विश्लेषकों से बातचीत के बाद अपनी रिपोर्ट में लिखा है, ''अमरीका को लगता है कि अगर भारत एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम को हासिल कर लेगा तो उसके सहयोगी देश क़तर, सऊदी और तुर्की भी रूस से इसके लिए संपर्क करेंगे और उसका हथियार कारोबार प्रभावित होगा.''
स्पूतनिक की रिपोर्ट में कहा गया है, ''भारत के एस-400 हासिल करने से पाकिस्तान और चीन की ताक़त प्रभावित होगी. इससे भारत पाकिस्तान की हवाई पहुंच और ख़ासकर लड़ाकू विमान, क्रूज़ मिसाइल और ड्रोन्स के ख़तरे को नाकाम कर देगा. ऐसा इसलिए है क्योंकि इसका ट्रैकिंग रेंज 600 किलोमीटर है और 400 किलोमीटर तक मार कर गिराने की क्षमता है. केवल तीन एस-400 में ही पाकिस्तान की सभी सीमाओं की निगरानी की जा सकती है.''